
ऐतिहासिक जीत का प्रतीक विजय दिवस-शिवानी जैन एडवोकेट 
ऑल ह्यूमन सेव एंड फॉरेंसिक फाउंडेशन कोर कमेटी मेंबर एवं भारतीय समाज दल की प्रदेश अध्यक्ष शिवानी यह एडवोकेट ने कहा कि यह युद्ध 3दिसंबर 1971 से लेकर 16 दिसंबर 1971 तक चला था। इस युद्ध का परिणाम पाकिस्तान का विभाजन और पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) की स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया। यह युद्ध न केवल सैन्य शक्ति के प्रदर्शन का उदाहरण था, बल्कि मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसके प्रभाव को भी दर्शाता है।
थिंक मानवाधिकार संगठन की एडवाइजरी बोर्ड मेंबर एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त साहित्यकार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई हिंसा के कारण लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए और भारत के पूर्वी हिस्सों, विशेषकर बंगाल, त्रिपुरा और असम में शरण लेने के लिए मजबूर हुए। भारत पर इस शरणार्थी संकट का गंभीर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पड़ा। भारत ने शुरुआत में कूटनीतिक तरीकों से इस मुद्दे को हल करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
मां सरस्वती शिक्षा समिति के प्रबंधक डॉ एच सी विपिन कुमार जैन, आलोक मित्तलएडवोकेट, ज्ञानेंद्र चौधरी एडवोकेट, डॉ आरके शर्मा, निदेशक डॉक्टर नरेंद्र चौधरी शार्क फाउंडेशन की तहसील प्रभारी डॉ एच सी अंजू लता जैन, बीना एडवोकेट आदि ने कहा कि
पाकिस्तान के निरंतर सैन्य अत्याचार और शरणार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, भारत ने सैन्य हस्तक्षेप का फैसला किया। तीन दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने भारत के कई हवाई अड्डों पर हवाई हमले किए, जिसे जवाबी कार्रवाई में भारत ने पूर्ण युद्ध में तब्दील कर दिया। यह युद्ध मुख्य रूप से पूर्वी और पश्चिमी मोर्चों पर लड़ा गया।





